लघु सिंचाई विभाग उत्तर प्रदेश सरकार Minor Irrigation Department, Government of Uttar Pradesh
आज़ादी का अमृत महोत्सव
लघु सिंचाई विभाग, उत्तर प्रदेश — बैनर 1
लघु सिंचाई विभाग, उत्तर प्रदेश — बैनर 2
लघु सिंचाई विभाग, उत्तर प्रदेश — बैनर 3
लघु सिंचाई विभाग, उत्तर प्रदेश — बैनर 3
किसानों के लिए ऑनलाइन सेवा

खेत तक पानी, हर किसान तक योजना

लघु सिंचाई विभाग, उत्तर प्रदेश

नलकूप योजनाओं के लिए ऑनलाइन आवेदन करें और अपने आवेदन की स्थिति कभी भी देखें।

12,61,657कुल आवेदन
8,00,148जिओ टैग्ड स्थल
63.4%जिओ टैगिंग प्रगति

मार्गदर्शन एवं नेतृत्व

श्री योगी आदित्यनाथ

श्री योगी आदित्यनाथ

माननीय मुख्यमंत्री,
उत्तर प्रदेश सरकार

मुख्यमंत्री
श्री स्वतंत्र देव सिंह

श्री स्वतंत्र देव सिंह

कैबिनेट मंत्री, जल शक्ति विभाग,
उत्तर प्रदेश सरकार

जल शक्ति मंत्री
श्री अनुराग श्रीवास्तव

श्री अनुराग श्रीवास्तव

प्रमुख सचिव,
उत्तर प्रदेश

प्रमुख सचिव
ई० देवेन्द्र कुमार

ई० देवेन्द्र कुमार

मुख्य अभियंता,
उत्तर प्रदेश

मुख्य अभियंता

लघु सिंचाई विभाग: एक परिचय

बार-बार पड़ने वाले सूखे से निपटने के लिए निजी सिंचाई साधनों के विकास की जो यात्रा 19वीं शताब्दी के अंत में शुरू हुई, वह वर्ष 1964 में एक स्वतंत्र लघु सिंचाई विभाग के रूप में स्थापित हुई।

  1. 1897–1900

    भीषण सूखों ने सिंचाई के नियोजित एवं त्वरित विकास का महत्व स्पष्ट किया।

  2. 1901

    प्रथम इरीगेशन कमीशन का गठन; निजी सिंचाई साधनों के विकास हेतु सुझाव दिए गए।

  3. 1939–41

    Agricultural Reorganization समिति ने नलकूप, छोटी बोरिंग व कूप छेदकों के प्रशिक्षण की अनुशंसा की।

  4. 1947

    मुख्य कृषि अभियन्ता के अधीन कार्य शुरू; मेरठ, कानपुर व वाराणसी में तीन जोन मुख्यालय बने।

  5. 1954

    1 जुलाई को विभाग नियोजन विभाग से सम्बद्ध किया गया।

  6. 1964

    शासनादेश सं0 5819/38-8-517/1964 दिनांक 08.10.1964 द्वारा लघु सिंचाई विभाग की स्थापना।

सूखे की बार-बार पड़ने वाली विभीषिका से निपटने हेतु 19वी शताब्दी के उत्तरार्द्ध में सिंचाई के विकास के महत्व को समझा जाने लगा था। वर्ष 1897-98 एवं 1899-1900 में पड़े भयंकर सूखों में सिंचाई के नियोजित एवं त्वरित विकास ने महती भूमिका निभायी। वर्ष 1901 में गठित प्रथम इरीगेशन कमीशन को देश में सूखे के विरूद्ध निपटने में सिंचाई के क्षेत्र में रिपोर्ट उपलब्ध कराने का कार्य सौंपा गया। कमीशन द्वारा निजी सिंचाई साधनों के विकास हेतु कतिपय सुझाव दिये गये। वर्ष 1939 में शासन द्वारा Agricultural Reorganization समिति गठित की गयी, जिसने वर्ष 1941 में अपनी रिपोर्ट दी। इसमें अन्य के अलावा जल उठाने के साधन/मशीनरी, छोटी बोरिंग, नलकूप, कूप छेदकों की ट्रेनिंग आदि के सम्बन्ध में कतिपय अनुशंसायें की गयी थी। उपरोक्त संस्तुतियों को वर्ष 1947 में मुख्य कृषि अभियन्ता के अधीन कार्यान्वित किया गया। सिंचाई का कार्य प्रदेश को तीन जोन में बांटकर कराया गया, जिसके मुख्यालय मेरठ, कानपुर तथा वाराणसी बनाये गये। इस प्रकार निजी नलकूपों हेतु बोरिंग का कार्य पहले एग्रीकल्चरल इन्जीनियरिंग विभाग के माध्यम से किया जाता था। पहली जुलाई 1954 को इस विभाग को नियोजन विभाग से सम्बद्ध किया गया, तत्पश्चात् वर्ष 1964 में शासनादेश सं0 5819/38-8-517/1964 दिनांक 08.10.1964 द्वारा आयुक्त कृषि उत्पादन एवं ग्राम्य विकास की देख-रेख में लघु सिंचाई विभाग की स्थापना की गयी।

आवेदन कैसे करें

किसी भी नलकूप योजना का लाभ लेने के लिए ये चार चरण हैं।

  1. पंजीकरण

    आवेदन करें पर जाकर मोबाइल नंबर व मूल विवरण के साथ पंजीकरण करें।

  2. आवेदन भरें

    आवेदक लॉग इन करें, योजना चुनें और आवश्यक दस्तावेज़ अपलोड करें।

  3. सत्यापन व जिओ टैगिंग

    विभागीय अधिकारी स्थल का सत्यापन कर उसकी जिओ टैगिंग करते हैं।

  4. स्थिति देखें

    लॉग इन करके किसी भी समय अपने आवेदन की वर्तमान स्थिति देखें।

विश्लेषणात्मक डैशबोर्ड

योजनावार प्राप्त आवेदन और उनमें से कितने स्थलों की जिओ टैगिंग पूरी हो चुकी है।

कुल प्राप्त आवेदन12,61,657
कुल जिओ टैग्ड8,00,148
जिओ टैगिंग प्रगति63.4%

उथले नलकूप

प्राप्त आवेदन11,50,854
जिओ टैग्ड7,31,580
कुल आवेदनों में हिस्सा: 91.2%
योजना विवरण

मध्यम गहरे नलकूप

प्राप्त आवेदन44,974
जिओ टैग्ड25,309
कुल आवेदनों में हिस्सा: 3.6%
योजना विवरण

गहरे नलकूप

प्राप्त आवेदन22,615
जिओ टैग्ड11,566
कुल आवेदनों में हिस्सा: 1.8%
योजना विवरण

ब्लास्ट कूप नलकूप

प्राप्त आवेदन7,486
जिओ टैग्ड3,611
कुल आवेदनों में हिस्सा: 0.6%
योजना विवरण

पम्पसेट/वाटरटैंक/हौज नलकूप

प्राप्त आवेदन35,728
जिओ टैग्ड28,082
कुल आवेदनों में हिस्सा: 2.8%
योजना विवरण

आँकड़े पोर्टल पर दर्ज आवेदनों से स्वतः अद्यतन होते हैं।

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